इस कहानी में, सीमा और रिया के बीच एक विशेष बंधन था। वे एक दूसरे के साथ अपने विचारों और भावनाओं को साझा करते थे। सीमा रिया को हमेशा सही रास्ते पर चलने की सलाह देती थी, और रिया सीमा की बातों को मानती थी।
एक माँ और बेटी की कहानी: अंतरवासना (A Mother and Daughter's Story: Intimacy) mom with daughter story antarvasna hindi
समीरपुर की सुहानी सुबह में जब धूप खिड़की से छनकर आती, तो माया जी अक्सर अपनी बेटी रिया को सोते हुए देखती थीं। रिया अब वह छोटी बच्ची नहीं रही थी जो उनकी उँगली पकड़कर चलती थी; वह अब शहर की एक बड़ी कंपनी में काम करने वाली एक स्वतंत्र महिला बन चुकी थी। लेकिन एक माँ के लिए उसकी संतान कभी बड़ी नहीं होती। इस कहानी में
सुनीता को यह बात पसंद नहीं आई क्योंकि वह अपनी बेटी को अपने से दूर नहीं करना चाहती थी। लेकिन प्रिया ने अपनी माँ को समझाया कि शहर में पढ़ाई करने से उसे बेहतर शिक्षा मिलेगी और वह अपने भविष्य को बेहतर बना पाएगी। mom with daughter story antarvasna hindi
सीमा और रोहिणी के बीच इस मुद्दे पर बहुत बहस हुई, लेकिन अंत में रोहिणी ने अपनी माँ की बात मानी और अभिनव से दूर हो गई। लेकिन कुछ समय बाद, रोहिणी को एहसास हुआ कि उसकी माँ ने उसके लिए सही किया था।
रिया अपनी माँ को अपनी सबसे अच्छी सहेली मानती थी। वह अक्सर कहती, "माँ, आप मुझे बिना कहे कैसे समझ लेती हो?"