Palitana 5 Chaityavandan In Hindi [hot] Full
4. चतुर्थ चैत्यवंदन: श्री पुंडरीक स्वामी जिनालय (Pundarik Swami Chaityavandan)
चैत्यवंदन की संक्षिप्त प्रामाणिक विधि (Step-by-Step Method)
2. द्वितीय चैत्यवंदन: श्री शांतिनाथ भगवान चैत्यवंदन (Second Chaityavandan: Shree Shantinath Bhagwan)
चैत्री पूनम ने दीने ए, पाम्या पद महानंद,ते दिन थी पुंडरीक गिरि, नाम दाने सुखकंद। (३) palitana 5 chaityavandan in hindi full
चैत्यवंदन करने की संक्षिप्त विधि
यात्रा की शुरुआत पर्वत की तलहटी से होती है, जिसे 'जय तलेटी' कहा जाता है। यहाँ पहला चैत्यवंदन किया जाता है।
यह वंदन पूरे शत्रुंजय पर्वत की महिमा को समर्पित है। सिद्धाचल को 'शाश्वत तीर्थ' कहा जाता है, जहाँ से अनगिनत आत्माओं ने मोक्ष प्राप्त किया है। यहाँ साधक पर्वत की पवित्रता और उसके कण-कण के प्रति वंदन करता है। प्रथम विमल गिरि राजे
5. रायण वृक्ष (Rayan Vruksh) - पांचवीं चैत्यवंदन
मुख्य टूंक के भीतर आदिनाथ प्रभु के गर्भगृह के ठीक बाहर प्राचीन रायण (खिरनी) का वृक्ष है। इसी वृक्ष के नीचे प्रथम तीर्थंकर भगवान आदिनाथ (ऋषभदेव) ने समवसरण किया था और साधना की थी। यहाँ उनके चरण पादुका (पगलिया) विराजमान हैं।
पर्वत की अधिष्ठायक देवी साढबा माता और अंबिका देवी के निमित्त यह चैत्यवंदन किया जाता है, जो तीर्थ की रक्षा करती हैं और भक्तों के विघ्न दूर करती हैं। कोटि मुनि परिवार
उवसग्गहरं पासवंजियं, वंदामि पासेमि णिच्चलं चैय। णमोत्थु णं जिणवरं, जिणवरे जिणसासणे णमोत्थु णं।। शांतिः शांतिः शांतिः।
पुंडरीक गणधार, प्रथम विमल गिरि राजे,कोटि मुनि परिवार, मुक्ति रमणी मुख साजे।चैत्र पूनम के दीह, सिद्ध भये सुखकार,तासु चरण चित धरी, वंदू वारंवार।। 1 ।।
4. चतुर्थ चैत्यवंदन: पुंडरीक स्वामी चैत्यवंदन
(शांतिनाथ भगवान की भक्ति का स्तवन बोलें)